Episode 10 – जब रिश्ते इम्तिहान लेने लगते हैंसुबह का वक़्त था।घर में वही रोज़मर्रा की आवाज़ें थीं—बर्तन, पानी, हल्की बातचीत।लेकिन Priyam के भीतरकुछ बदला हुआ था।वह अब भी वही थी,पर अंदर से थोड़ी मज़बूत।आज उसने तय कर लिया थाकि चाहे कुछ भी हो,वह अपनी बात से पीछे नहीं हटेगी।डाइनिंग टेबल पर सब बैठे थे।माँ, पापा,और कुछ रिश्तेदार जो कल ही आए थे।बात वही घूम-फिर करएक ही जगह आ रही थी।“तो आगे क्या सोचा है?”एक रिश्तेदार ने पूछा।कमरे में हल्की-सी चुप्पी छा गई।Priyam ने माँ की तरफ़ देखा।माँ ने कुछ नहीं कहा,बस आँखों से इशारा किया—बोलो।Priyam ने गहरी साँस ली।“अभी