पछतावे की पहली रात

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रात के गहरे सन्नाटे को चीरती हुई तेज़ बारिश की गुर्राहट पूरे माहौल पर हावी थी।आसमान मानो अपना सारा दर्द ज़मीन पर उंडेल देने की ज़िद पर अड़ा हुआ था। मूसलाधार बारिश लगातार बरस रही थी, और उसकी अनगिनत बूंदें घर की खिड़कियों से टकराकर एक बेचैन कर देने वाली धुन बना रही थीं।बाहर हवाएँ बेकाबू होकर चीख रही थीं, लेकिन उनसे कहीं ज़्यादा भयंकर तूफ़ान उस घर के अंदर, उस बंद कमरे में उठ रहा था।ऐसा तूफ़ान जो दीवारों को नहीं, किसी के दिल को तोड़ रहा था... किसी की उम्मीदों को चकनाचूर कर रहा था।कमरे में फैला भारी