लेखिका: दीपक शर्मा ड्यूटी रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर के साथ मैं ने अपना अराइवल टाइम दर्ज किया : दो बजे। मेरे नाम के आगे मेट्रन ने रिकवरी रूम लिख रखा था। मैं वहीं पहुंच ली। सिस्टर सुशीला की पहरेदारी में बेड नम्बर दो पर एक बच्ची बेसुध लेटी थी। रूम के बाकी दो बेड खाली थे। “कैसा आपरेशन