चारपाई की व्यथा

  • 183
  • 2

नया काव्य संग्रह -चरपाई की व्यथा *- डॉ वंदना शर्मा*कविता लिखना मेरे लिए शब्दों का खेल नहीं, एक जिम्मेदारी है। आज जब मैं चारों ओर देखती हूँ तो पाती हूँ कि हम बहुत तेजी से भाग रहे हैं। इतनी तेजी से कि अपनी परछाई, अपनी मिट्टी, अपनी 'चारपाई' तक को पीछे छोड़ आए हैं। मोबाइल की स्क्रीन पर उगते बच्चों को देखकर मन काँप जाता है। रिश्ते रील बन गए हैं और संस्कार रूल्स लगने लगे हैं। इसी दर्द से जन्मा है मेरा यह काव्य संग्रह। *यह संग्रह उन सब चीजों की 'व्यथा-कथा' है जिन्हें हमने आधुनिकता की अंधी दौड़ में खो दिया है।* इसमें