*'किरन' - ये सिर्फ एक शिष्या की कहानी नहीं है, ये हर उस गुरु की जीत है जो बच्चों में 'इंसान' बनाता है।यह कहानी मेरी शिष्या की है। उससे मेरा परिचय एम.ए. की कक्षा के दौरान हुआ। पहली बार जब वो प्रवेश लेने आई थी, साधारण सी लगी। उसने गणित से स्नातक किया और हिन्दी से परास्नातक करना चाहती थी। आश्चर्य के साथ मैंने उससे पूछा कि तुम जब गणित की छात्रा हो तो हिन्दी में क्यों आना चाहती हो? वो बड़े भोलेपन से बोली - "मैम जब हम इंटर में थे तो इंजीनियर बनना चाहते थे। परीक्षा भी दी प्रवेश