बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान की सीढ़ियों पर उस छोटे बच्चे को देख कर पहले तो मैं हैरान हुआ। मेरी दुकान पर उस का क्या काम हो सकता था? फिर जैसे ही उस ने तिरछी नज़र से पीछे मुड़कर देखा तो पाया सड़क के उस पार अरूणा बैठी थी। एक होल्ड- औल व बड़े सूटकेस के साथ। जब तक अरूणा अकेली यात्रा करती रही थी,