चंदौली की चुनार - 1

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Part-1कुछ कहानियाँ मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं लिखी जातीं।वे सिर्फ इसलिए लिखी जाती हैं ताकि समय उन्हें मिटा न सके।मैं, स्वाति, आज बीस साल की हूँ।मेरे फोन में हज़ारों तस्वीरें हैं, सैकड़ों चैट्स हैं, और अनगिनत यादें हैं।लेकिन उन सबके बीच एक नाम ऐसा है जो आज भी मेरी मुस्कान का कारण बन जाता है।अभिमन्यु वह, जिसे मैं अभिमन्यु कहती हु ,अजीब बात यह है कि यह उसका असली नाम भी नहीं है।उसका असली नाम तो मुझे आज तक याद ही नहीं हुआ मेरे लिए तो वह हमेशा अभिमन्यु ही रहा।चार साल पहले, जब मैं सोलह साल की थी, मु