राहें - 1

एक कर्तव्य ऐसा भीस्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध वतपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियोंव भक्तों के ठहरने व खाने की निशुल्क व्यवस्था थी। परिचित भक्तोंव अनुयायियों के अतिरिक्त कोई भी अपरिचित तीर्थयात्री भी वहाँठहर सकता था व भोजन ग्रहण कर सकता था। भगवान की ऐसीकृपा थी कि उनका यह लंगर वर्षों से चल रहा था। भक्तों को भीस्वादिष्ट व निशुल्क भोजन (प्रसादी) पाने के बाद दान देने की प्रेरणास्वतः होती थी। इसलिये स्वामी जी की ख्याति दूर दूर तक फैलीहुयी थी। परन्तु स्वामी जी किसी से कुछ नहीं मागते थे, स्व प्रेरणासे