माई डियर प्रोफेसर - भाग 27

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-----------------नैना सांसे थामे खडी थी। अमोघ गहरी नजरो से उसे देख रहा था। " अमोघ मै..." नैना बोलने लगी ही थी कि अमोघ ने बांहो से पकड नैना को खुद से सटा लिया। नैना सिहर उठी । दोनो की बीच दाल के दाने जितनी दूरी नही थी। नैना की सांसे रफ्तार पकडने लगी वही अमोघ..उसकी धडकने नैना साफ सुन सकती थी। वो तेज थी , अस्थिर थी...एकलौता सबूत कि अमोघ भी उसी तरह एफेकटिड है जितनी नैना है। " कब तक दूर रहने का.सोचा है आपने नैना ! कब तक ? " , अमोघ नैना के चेहरे की तरफ झुक गया। " अमोघ तुम