मन की शक्ति

(मन की शक्ति)लेखक: विजय शर्मा एरीपंजाब के एक छोटे से गाँव में मानव नाम का एक युवक रहता था। वह पढ़ा-लिखा, समझदार और मेहनती था, लेकिन उसके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती थी। गाँव के लोग अक्सर कहते—“मानव, तुम्हारे पास सब कुछ तो है। अच्छा परिवार है, घर है, खेत हैं, फिर भी तुम इतने परेशान क्यों रहते हो?”मानव हल्की मुस्कान देकर बात टाल देता, क्योंकि वह जानता था कि उसकी सबसे बड़ी कैद किसी जेल की चारदीवारी नहीं, बल्कि उसका अपना मन था।उसे हर समय किसी न किसी बात की चिंता लगी रहती। कभी भविष्य की, कभी असफलता