तुम और मैं

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हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा इंसान होता है, जो सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक एहसास होता है। एक ऐसी रूह, जो आपकी धड़कनों में बसती है, आपकी मुस्कुराहट की वजह बनती है और आपके वजूद का अभिन्न हिस्सा बन जाती है। वो इंसान जिसे देखते ही तमाम उलझनें थम सी जाती हैं और जिंदगी एक सुकून भरी कविता जैसी लगने लगती है। मेरे लिए, वो रूह, वो नाम और वो सुकून—कान्हा पचौरी है।​जब मैं 'कान्हा' शब्द कहती हूँ, तो मेरे ज़ेहन में दुनिया की दिखाई गई वो बाहरी तस्वीरें नहीं आतीं, बल्कि उन गलियों की यादें आती