अब ये रोज़ का सिलसिला बन गया था…सुबह की वो पवित्र घड़ी…मंदिर की वही सीढ़ियाँ…और सुनामी और कृतिक का यूँ मिलना…कभी भगवान के सामने खड़े होकर…तो कभी मंदिर के पीछे वाले शांत कोने में बैठकर…दोनों बातें करते…वो जगह अब उनकी छोटी-सी दुनिया बन चुकी थी…।Title song आया - मंदिर की सीढ़ियों पे पहली मुलाकात थी,तेरी आँखों में जैसे कोई खास बात थी…हाथ में प्रसाद, दिल में ख्वाब लिए,तू सामने आई तो रुक गई हर घड़ी…घंटी की आवाज़ में, तेरा नाम सुनाई दिया,रब के दर पे ही मुझे, मेरा प्यार मिल गया…एक दिन…मंदिर के पीछे पुराने पीपल के पेड़ के नीचे… दोनों