Part 14 डायरी का अगला पन्ना खोलते ही मेरे चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गई। पता नहीं क्यों, अब हर नया पन्ना पढ़ते समय ऐसा लगता था जैसे मैं किसी कहानी का अगला अध्याय नहीं, बल्कि किसी की धड़कनों का अगला राज़ जानने वाली हूँ। कई बार तो मैं खुद से पूछ बैठती थी..."अगर यह सिर्फ़ एक कहानी है... तो इसे पढ़कर मेरा दिल इतनी तेज़ धड़कने क्यों लगता है?"मैंने उस सवाल का जवाब ढूँढ़ने की कोशिश नहीं की।बस चुपचाप अगला पन्ना पलट दिया।"दीपावली के अगले दिन..."हमारी बात शुरू हुए अभी एक ही दिन हुआ था।लेकिन पता नहीं क्यों...ऐसा