हर बड़ा इंसान, अपने अंदर एक छोटा बच्चा हमेशा संभाल कर रखता है। कान्हा की शख्सियत की गहराई को समझने के लिए, मुझे उनके बचपन के उन पन्नों को पलटना ज़रूरी लगता है, जहाँ से इस सादगी और ज़िद का जन्म हुआ।कान्हा का बचपन बहुत ही अलग और अपनी ही धुन में रहने वाला रहा है। जहाँ दूसरे बच्चे खिलौनों के पीछे भागते थे, कान्हा में बचपन से ही एक ऐसी समझ थी जो उनकी उम्र से कहीं बड़ी लगती थी। सुनने में आता है कि वो बचपन में बहुत ही भोले और मासूम थे ,याद आता है वह दिन,