हर सुबह एक नई शुरुआत लेकर आती है, लेकिन आर्य की ज़िंदगी में ऐसा नहीं था। जब उसकी आँख खुली तब तक सुबह हो चुकी थी, लेकिन उसका कमरा अभी भी अंधेरे से ढका हुआ था। शायद इसलिए क्योंकि उसके कमरे में आने वाली रोशनी को पर्दों ने रोका हुआ था, या फिर उसके मन की तन्हाई ने उसके आस-पास भी अंधेरे में अपना घर ढूंढ लिया था, जिसमें उम्मीद की कोई किरण नज़र नहीं आती।आर्य उठता है और अपने टेबल के पास पड़े फोन को उठाता है। वो जैसे ही फोन खोलता है, उसमें आज कोई भी कॉल या