राहें - 5

अकेलापनभरी दोपहरी में भी सड़क सूनसान, चारों ओर सन्नाटा औरपुलिस वालों की मात्र पहरेदारी थी। अन्नू अपने 7 वर्षीय बच्चे कोस्कूटी में बैठाकर हास्पीटल जाने के लिये घर से निकली। स्कूल,कालेज सब बंद है, घर काम वाली महिला कर्मचारियां भी नही आरही हैं, इसलिये बच्चे अतुल को अस्पताल ले जाना पड़ता है। घर मेंछोटे बच्चे को छोड़े भी तो किसकी देखरेख में छोड़े अन्नू ने अपनीचुन्नी सिर में बॉँधी और स्कूटी से वह अस्पताल पहुँच गई । अस्पतालमें इन दिनों ज्यादा भीड़ थी,सब अपने अपने मरीज के उपचार हेतुदौड़ भाग कर रहे थे। कोई अपने मरीज के ठीक होने के