स्कूल के दिन आज अपने बेटे को स्कूल भेजते हुए ख्याल आया कि कभी हम भी स्कूल जाते थे। फर्क सिर्फ इतना है हम सारा काम स्वयं करते थे। स्वयं तैयार होते, खुद ही बैग पैक करते और तो और हमें स्कूल तक छोड़ने भी कोई नहीं जाता। हम खुद ही पैदल-पैदल स्कूल जाते। और ! कितने समझदार थे हम। एक ये हैं आजकल के बच्चे, टिफिन भी पैक करके दो। बैग भी पैक करो, छोड़ने भी जाओ, लिवा कर भी लाओ। हमें तो जो मिलता खा लेते कभी नखरे नहीं किये। और ये देखो आजकल के बच्चे, यह नहीं खाना, वो नहीं खाना। सौ नखरे। खाना लेकर उनके आगे-पीछे दौड़ो। मैं और मेरा