Raaz - Part 7

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मेरी है।"अवंतिका खिड़की के सामने खड़ी रह गई। उसकी नज़र बार-बार उन तीन शब्दों पर टिक जा रही थी। वे सिर्फ़ तीन शब्द थे, लेकिन उनके पीछे छिपा एहसास किसी भी डरावने दृश्य से ज़्यादा भयावह था। क्योंकि यह कोई सपना नहीं था।यह उसकी अपनी खिड़की के शीशे पर लिखा हुआ सच था।उसने तुरंत अपना फोन निकाला और उन शब्दों की तस्वीर खींच ली। फिर धीरे से खिड़की खोली और नीचे झाँका।नीचे कोई नहीं था। गेस्ट हाउस की दीवार बिल्कुल सीधी थी। न कोई पाइप, न बालकनी, न ऐसा सहारा जिसके सहारे कोई दूसरी मंज़िल तक पहुँच सके।अवंतिका ने उँगली