"प्रिया, हाँ माँ..." कमरे में बैठी प्रिया ने किचन से आ रही आवाज़ की तरफ मुँह करके कहा।"यहाँ आ जा," ये आवाज़ उसकी माँ, सरिता की थी। प्रिया उठी और किचन की तरफ दौड़ पड़ी। माँ के हाथ में बेलन देखते ही, प्रिया को पिछली बार की डाँट याद आ गई। "तू गोल रोटी क्यों नहीं बनाती? इतने दिन से सीख रही है, पर तुझसे बनती ही नहीं है," उसकी माँ ने उसे डाँटते हुए कहा था।प्रिया ने अपनी माँ की तरफ देखकर रोनी जैसी सूरत बना ली। उसे ऐसे देख मां मुस्कुराकर बोली, "बेटा, तुझे सिखाने के लिए ही