3 दिसंबर 2022 की उस मुलाकात के बाद, अब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं था। सच की उस गहराई ने हमें एक-दूसरे के और करीब ला दिया था। लेकिन अब समस्या दूरी की नहीं, बल्कि 'साधन' की थी। मेरे पास अपना कोई फोन नहीं था, और कान्हा से बात करना मेरी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा बन चुका था।मेरी जिंदगी का वह दौर कॉलेज की उन जगहों में सिमटा हुआ था। मैं अपने कॉलेज के फ्री टाइम का बेसब्री से इंतज़ार करती—न तो कैंटीन की मस्ती के लिए, न ही दोस्तों के साथ गप्पें मारने के लिए, बल्कि इसलिए कि