सुबह का समय था…पर आज… सूरज की रोशनी भी फीकी लग रही थी…एयरपोर्ट…लोग आ-जा रहे थे…किसी के लिए शुरुआत…किसी के लिए जुदाई…।और आज…सुनामी और कृतिक…दोनों उसी भीड़ में खड़े थे…पर उनके लिए…दुनिया थम सी गई थी…सुनामी की आँखें नम थीं…हाथ में टिकट…दिल में हजारों सवाल…कृतिक उसे बस देख रहा था…जैसे हर पल… उसे याद कर लेना चाहता हो…कुछ देर…दोनों चुप रहे…फिर…सुनामी (धीरे, कांपती आवाज़ में) बोली - Time हो गया है…कृतिक ने हल्का सा सिर हिलाया…पर… उसके पैर जैसे वहीं जमे थे…सुनामी (आँखों में आँसू लिए) बोली - कुछ बोलोगे नहीं…?कृतिक ने गहरी सांस ली…कृतिक (धीरे से) बोला - बस… इतना कि…अपना ख्याल