पिता न बन पाने का दर्दउसके भीतर के पति पर भारी पड़ चुका था।आसिफ ने धीमी मगर ठंडी आवाज़ में पुलिस से कहा —“आप लोग जाइए…यह हमारा घर का मामला है।”इतने में दरवाज़े पर हलचल हुई।सबकी नज़र एक साथ उधर मुड़ गई।दरवाज़े पर रेशमा खड़ी थी।कमज़ोर… पीली…मानो शरीर में अब जान का एक कतरा भी बाकी ना हो।अस्पताल के कपड़ों के ऊपर एक फीकी सी चादर डली थी।उसकी बाँहों में सफेद कपड़े में लिपटाउसका मृत बच्चा था…जिसे वह अब भी ऐसे पकड़े हुई थीजैसे कोई उससे फिर छीन न ले।उसके लड़खड़ाते शरीर कोउसकी सौतेली छोटी बहन साजिया संभाले हुए थी।पीछे