सुबह के पाँच बजे थे।चंदनगढ़ की सुबह बाकी जगहों जैसी नहीं थी। न अज़ान की आवाज़, न मंदिर की घंटियाँ। यहाँ सुबह बिना किसी शोर के धीरे-धीरे उतरती थी, मानो ख़ामोशी को भी जगाने से डरती हो।अवंतिका पूरी रात नहीं सोई थी।वह बिस्तर पर बैठी नोटबुक खोले बस एक ही बात सोचती रही—माँ... सुमित्रा शर्मा। वही माँ जो हमेशा कहती थीं कि उनका बचपन उत्तर प्रदेश में बीता था। वही माँ जो बचपन में उसे एक अनजानी-सी धुन सुनाकर सुलाती थीं। और वही माँ, जिनकी आँखों में उस दिन एक अजीब-सा डर उतर आया था, जब छोटी-सी अवंतिका ने अपनी बाईं