अतीत का कसाई और वजूद का कत्ल (बीस खौफनाक भाग)भाग एक: आँखों में जमा बर्फअजनबी के उन तीन शब्दों—" वह लौट आई" —ने इकबाल के भीतर के जलते हुए ज्वालामुखी को एक ठंडी राख में बदल दिया. उसके हाथ कांपने लगे. उसे महसूस हुआ कि उसके ठीक पीछे कोई खडा है, जिसकी सांसों में वफादारी नहीं, बल्कि सडते हुए सपनों और धोखे की बदबू है.भाग दो: बलरामपुर का वो विषैला सायादरवाजा पूरी तरह खुलता है. सामने खडी है' वह' उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की उन गलियों से आई वह औरत, जिसने कभी इकबाल के नाम का सिंदूर लगाया था