Conversations With Myself - 3

  • 132

ज़िंदगी सच में अजीब होती है।इतना कुछ हो जाता है कि एक दिन अचानक एहसास होता है—हम बड़े कब हो गए?लोग अक्सर कहते हैं, "काश बचपन वापस मिल जाए।"लेकिन मैं हमेशा चुप रह जाती हूँ।क्योंकि मेरे लिए बचपन सिर्फ़ मासूमियत नहीं था। अगर बचपन वापस आएगा, तो उसके साथ वो दिन भी लौटेंगे जिन्हें भूलने में ही बरस लग गए। कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें दोबारा जीने की हिम्मत शायद किसी में नहीं होती।हाँ, अगर वक़्त सच में पीछे लौट सकता… और मुझे सिर्फ़ एक दिन बदलने का मौका मिलता, तो शायद मैं उसे बदल देती।लेकिन ज़िंदगी ऐसी कहाँ