मेरा देश

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मेरा देश                           एक हिंदी कहानी— विजय शर्मा 'एरी' —सूरज अभी पूरी तरह ऊगा भी नहीं था कि सूबेदार रामसिंह अपने आंगन में खड़े हो गए। हाथ में वही पुरानी लाठी, कंधे पर वही फौजी कंबल, और आंखों में वही चमक जो पचास साल पहले सीमा पर पहरा देते समय हुआ करती थी। गांव का नाम था — कुशालगढ़, राजस्थान की उस पट्टी में बसा एक छोटा-सा गांव, जहां रेत के टीलों के पीछे से हर सुबह सूरज कुछ इस तरह निकलता था मानो खुद तिरंगे का केसरिया रंग