तुम और मैं - 7

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21 जनवरी की वो सुबह कुछ अलग थी। कान्हा बाइक लेकर आए थे और उन्होंने मुझे पीछे बिठाया। हम शहर के शोर से दूर, उस पहाड़ी मंदिर की ओर निकल पड़े। रास्ते भर ठंडी हवाएँ चेहरे को छू रही थीं, लेकिन कान्हा के पीछे बैठना और उनके जैकेट की गर्माहट महसूस करना, उस सर्दी को भी प्यार में बदल रहा था।​जब हम मंदिर पहुँचे, तो सामने खड़ी थीं—108 सीढ़ियाँ। उन्हें देखकर ही एक बार तो लगा कि क्या हम चढ़ पाएंगे? पर कान्हा ने मेरा हाथ थामा और बोले, "साथ चलेंगे, थकोगी नहीं।"​उन 108 सीढ़ियों को चढ़ना किसी परीक्षा से