: ' पुस्तकें ' विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर"जिस घर में किताबें मुस्कुराती हैं, वहाँ अज्ञान धीरे-धीरे हार जाता है।"गाँव रामपुर का एक साधारण लड़का था—दीपक। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते थे और माँ घर-घर जाकर सिलाई का काम करती थीं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो समय का भोजन जुटाना भी कठिन हो जाता था। लेकिन दीपक की आँखों में एक सपना था—कुछ ऐसा बनने का, जिससे वह अपने माता-पिता का जीवन बदल सके।गाँव के बच्चे स्कूल के बाद खेलते थे, लेकिन दीपक का सबसे बड़ा खेल था—किताबों