नियति का खेल

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कहानी: नियति का खेलरविवार का दिन था। सीमा फोन में फेसबुक पर अपनी कविता पर आई पाठकों की प्रतिक्रिया पढ़ रही थी। तभी उसकी नजर एक नाम पर रुक गई। रिद्धि ने उसकी कविता पर प्रतिक्रिया दी थी - "आपकी कविता आपकी तरह ही निश्चल है, मासूम है।" सीमा को लगा ये कहीं वही रिद्धि तो नहीं जो कॉलेज में उसकी छात्रा थी क्योंकि इतनी गहराई से तो उसे वो ही जानती थी।सीमा कॉलेज की यादों में पहुंच जाती है।  रिद्धि एक भोली सी प्यारी सी लड़की, एम.ए में पहली बार जब वो हिंदी क्लास लेने आई थी। क्लास में जहां