(रात का वक़्त। आसमान में हल्के बादल हैं, पर उनमें से चाँद की एक हल्की सी झलक दिखती है।सिया बालकनी में है — सजी धजी लाल साड़ी में , किसी मासूम दुल्हन सी लग रही थी। हाथ में चलनी और थाली लिए हुए।उसकी आँखों में इंतज़ार है, पर चेहरा थका हुआ और फीका लग रहा है।)(धीरे-धीरे हवा तेज़ चलने लगती है, उसके बाल चेहरे पर उड़ते हैं।वो थाली उठाती है, चाँद की ओर देखती है — और मुस्कुरा देती है।)सिया (धीरे से) बोली - “चाँद निकल आया… अब व्रत पूरा हो गया…”(वो चलनी से चाँद देखती है, पर आगे वो canfuse