“गुण्टी...गुण्टी... । जाने कहाँ गई है गुण्टी सुबह-सुबह? आज इतनी सुबह कैसे जग गई? ज़रुर खिड़की से निकल गई होगी गुट....गुट....ट”। “अम्मा, क्यों परेशान होती हो। कूदती-फांदती हरियाली के पीछे भाग गई होगी। कुछ खा-पीकर लौट आएगी...”। मौसी ने कहा। “हाँ री बच्ची। परेशान क्यों न रहूँ। सबसे सुंदर है मेरी गुण्टी। मुझे तो इसकी चिंता खाए जाती है कहीं पकड़ी गई तो....हाय!” अम्मा सिसक उठी। तभी गुण्टी उसे खिड़की पर दिखाई दी और वह चिल्ला उठी, अरे ओ गुण्टी, चल इधर.....कहाँ गई थी?” गुण्टी फुर्र से नीचे उतरी और चूजों के साथ हिल-मिल गई। गुण्टी को देख सब हैरान