माई डियर प्रोफेसर - भाग 31

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----------------चारू भोचक्की सी खडी थी। उसके सामने अमर खडा था जो इस समय गुस्से से लाल हो गया था। अमर आगे बडा और हर एक शब्द चबाते हुए बोला, " फालतू कामो मे ध्यान लगाना बंद करो चारू। मेरे पास बकवास चीजो के लिए समय नही। मेरे कुछ गोल्स है, एम्बिशन है। बर्बाद करने के लिए समय नही.मेरे पास। "उसने गहरी सांस भर खुद को शांत करने की कोशिश करी ।" खेर तुम नही समझोगी। "चारू अमर का मुंह तकती रह गई।  उसने रिएक्शन की उम्मीद करी थी। डांट की उम्मीद करी थी। मगर ये..ये.अपमान ! इसकी उसे उम्मीद नही.थी।चारू की