हुक्म और हसरत - 18

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️ हुक्म और हसरत ️#Arsiaहाथों का वो एक पल का साथ, सदियों की दुआ बन गया,जिसे छूना भी मुनासिब न था, वही दिल की वजह बन गया।वो ख़ामोश रहा, हम भी कुछ कह न सके,मगर उस ख़ामोशी में इश्क़... बेआवाज़ पलता रहा।दरवाज़े की चौखट पर अर्जुन खड़ा था।आज वो हमेशा वाला अर्जुन नहीं लग रहा था।उसके बाल, जिन्हें वो हमेशा करीने से सेट रखता था, आज बिखरे हुए थे। काली शर्ट की बाँहें कोहनी तक मुड़ी हुई थीं, और पहली बार उसकी शर्ट भी ठीक से टक नहीं थी।उसका चेहरा थका हुआ था...आँखें पूरी तरह लाल थीं, जैसे कई घंटों