अधीन राज्य

                   इस मकान को उषा अपना अधीन राज्य मान कर चलती है और हम परिवार वालों को अपनी प्रजा।                 बेशक उस के परिवार में मैं एक बाहरी व्यक्ति की हैसियत से आया था। दफ़्तर में उस का जूनियर बन कर और मकान में उस का किराएदार ।                 यह संयोग ही था कि जिस समय कस्बापुर के एक निजी संस्थान में मेरी पहली नियुक्ति हुई थी, उषा के मकान के वे दो कमरे खाली थे जिन्हें अपने