राधे राधे! "मैं नहीं आई थी तुम्हारी ज़िंदगी में... वो तुम थे जो मेरे पास आए थे! वो तुम थे जिसने मुझे एहसास दिलाया था कि प्यार क्या होता है, और अब... अब मुझसे यूँ मुँह मोड़ रहे हो?"लड़की की आँखें रोते-रोते सुर्ख लाल हो चुकीं थीं। आवाज़ में इतना दर्द था कि पत्थर भी पिघल जाए। लेकिन सामने खड़े उस शख्स पर जैसे कोई असर ही नहीं हुआ। उसने लड़की की तड़प और उन लाल आँखों को पूरी तरह इग्नोर करते हुए, चीखकर कहा—"मुझे नहीं पता वो क्या था, क्यों था! कुछ नहीं जानता मैं! बस इतना जानता हूँ