भाग – 2 : सीमाओं से भी बड़ा प्रेमरात के तीन बज चुके थे।आरव की आँखों में नींद नहीं थी। मोबाइल की स्क्रीन पर वही आख़िरी संदेश चमक रहा था—"Aarav... Don't come."उसने शायद सौ बार कॉल किया, लेकिन हर बार फोन बंद मिला।सुबह होते ही उसने खुद से एक सवाल पूछा—"अगर मैं नहीं गया, और यह उसकी मजबूरी हुई तो? अगर मैं गया, और उसने सच में मुझे नहीं चाहा तो?"कई मिनट तक वह चुप बैठा रहा।फिर उसने पासपोर्ट उठाया, टिकट हाथ में लिया और आईने में खुद को देखकर कहा—"प्यार डर से नहीं, भरोसे से चलता है। मैं जाऊँगा।"---दो