"आख़िरी किताब" - एक साहित्यिक कहानीभैरवपुर का पुस्तकालय अब कोई नहीं जाता था।एक ज़माना था जब उसकी दीवारें नए अखबारों की खुशबू से महकती थीं, जब सुबह-सुबह कॉलेज के लड़के साइकिल पर आकर पूछते थे, "मास्टर जी, दिनकर की नई कविता आई क्या?" अब वहाँ सिर्फ एक पीपल का पेड़ था जो छत पर उग आया था, और अंदर एक आदमी - मास्टर जी।मास्टर जी का असली नाम राघव प्रसाद था। हिंदी के रिटायर्ड अध्यापक। पाँच साल से बिना वेतन के इस सरकारी पुस्तकालय को संभाल रहे थे। लोग कहते, "मास्टर जी सठिया गए हैं।" क्योंकि वह हर आने वाली