Hindi Classic Stories Books and stories free PDF

    चहुँ और प्रेम
    by राज बोहरे
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    ⭕*|| सखी ||**० राजनारायण बोहरे*________________________रात में सोते हुए जागने की बीमारी है मुझे। बरसते पानी की ‘टप्प  टप्प‘ ध्वनि के बावजूद जब अहाते के बाहरी दरवाजे की कुण्डी खड़की,  ...

    सबेरे सबेरे
    by r k lal Verified icon
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    सबेरे सबेरेआर 0 के 0 लालसंजीव अपने बॉस के कमरे से निकल कर कार्यालय के हाल में आया तो उसने सबको बताया कि आज बॉस का मूड बहुत खराब ...

    अब लौट चले - 4
    by Deepak Bundela Moulik
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    अब लौट चले -4तभी बस का हॉर्न बजा तो मेरी तन्द्रता भंग हुई... लोग बस में बैठने लगे थे... और बस धीरे -धीरे रेंगने लगी थी.. मन असमंजस में ...

    MURDER MYSTERY - 1
    by Vismay
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    " लगातार बज रहीं टेलीफोन की घंटी की वजह से हवलदार मातरे की नींद खुल गई."                           ...

    मैडम का मन जीत लिया
    by Monty Khandelwal
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    3 दिन पहले की ही बात है | मुझे  मारवाड़ जाना है| जिसकी टिकट निकलने के लिए में  रेलवे स्टेशन गया था | जहाँ पे  रिजर्वेशन टिकट मिलती है ...

    अब लौट चले - 3
    by Deepak Bundela Moulik
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    अब लौट चले -3शायद रवि को मनु की बात का बुरा लगा था... मै उसके पीछे पीछे जानें लगी थी.. रवि... रवि... आप तो बुरा मान गये...?और मै झट से ...

    बाँझ
    by Mirza Hafiz Baig
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    बांझ1.शाम. . .खिड़की से बाहर देखते हुए, अपनी आत्मा के दर्द को महसूस करना जैसे उसके जीवन का ढर्रा बन गया था। शाम, रात में बदलने लगी थी। उसने ...

    अब लौट चले - 1
    by Deepak Bundela Moulik
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    अब लौट चले आज मुझें ऐसा लग रहा था कि मै सच में आज़ाद हूं, सारी दुनियां आज पहली बार मुझें नई लग रहीं थी, सब कुछ नया और सुकून ...

    अम्मा
    by Ila Singh
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    अम्मा  *******   “आज हमसे खाना नही बनेगा भाई !”भाभी ने रोटी सेकते-सेकते झटके से आटे की परात अपने आगे से सरका दी और झल्लाते हुए लकड़ी के पटरे को पैर से ...

    हीरो
    by Saurabh kumar Thakur
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    बात है,बिहार के एक ऐसे जिला जहाँ नक्सली हमले होते रहते हैं,और ज्यादा नक्सली वहीं होते हैं । उस जिले में बारह दोस्त रहते थे,पहले का नाम सौरभ,दूसरे का ...

    इन्कार
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                        इन्कार​आज राजा देवकीनन्दन एण्ड डायमंड जुबली महाविद्यालय ,मुंगेर के कैम्पस में नयी चहल-पहल थी। ऐसी चहल पहल प्रायः प्रतिवर्ष ...

    दास्तान-ए-अश्क - 30 - लास्ट पार्ट
    by SABIRKHAN Verified icon
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    कहते हैं ना मजबूरी इंसान को बहुत कुछ करवाती है जिंदगी में पहली बार उसने अपने भाइयों से मदद मांगी.. मरने से तो यह रास्ता उचित ही था l ...

    गांव की पंडिताइन
    by r k lal Verified icon
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    "गांव की पंडिताइन" आर0 के0 लाल     विजयदशमी के अवसर पर पंडिताइन ने अपने घर में भंडारा किया। कई गांवों के लोगों को निमंत्रण दिया था। बड़ी संख्या ...

    मेरा गाँव मेरा देश
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                     मेरा गाँव मेरा देश​नैनसी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से ’एम फील’ की परीक्षा उत्तीर्ण कर गयी। उसका शोध का विषय था ’’इण्डियन कल्चर ...

    एक और मौत
    by Deepak Bundela Moulik
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    रुपहले पर्दे के पीछे का सच मैने मेकअप रूम के दरवाजे को नॉक किया था, कि तभी अंदर से लीना मेम की आवाज़ आई.... कौन हैं....? मेम मै सुमित.... ...

    दास्तान-ए-अश्क - 29
    by SABIRKHAN Verified icon
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    मेम साहब कलयुग के इस काले दौर में लोग इतने स्वार्थी हो गए हैं कि अपने खून के रिश्तो का भी लिहाज नहीं करते जान लेने की नौबत आये ...

    अतीत
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                          अतीतलगभग एक घंटा से स्थापना समिति की बैठक समाहर्ता कक्ष में चल रही थी।ज़िला के आला अधिकारी इसमें ...

    रिश्ता अपनो से
    by Manjeet Singh Gauhar
    • (3)
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    आपने अब तक शायद सिर्फ़ ऐसे लोगों को ही देखा होगा जो ये कहते हैं कि ' मेरे परिवार में तो चार सदस्य हैं या पाँच सदस्य हैं या ...

    दास्तान-ए-अश्क - 28
    by SABIRKHAN Verified icon
    • (29)
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    "बस करो रज्जो अब मुझसे और नहीं भागा जा रहा!" पसीने से भीगे कपडों में उसे घबराहट हुई तो वो बोल उठी! -कुछ देर कहीं बैठ जाते हैं!' "नहीं ...

    अनुराग
    by Mukteshwar Prasad Singh
    • (4)
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                            अनुरागचारों ओर कितने परिवर्तन हो चुके थे। हों भी क्यों नही पूरा एक दशक जो बीत गया ...

    घौंसला
    by Bhupendra Dongriyal
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                                    "घौंसला" आज मन उदास है। मैं ही नहीं श्रीमती जी दोनों बेटियाँ और ...

    टूटी चप्पल
    by Manjeet Singh Gauhar
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    बहुत समय पहले की बात है। जबकि तब हमारे देश में मुग़ल बादशाह शाहजँहा का शासन हुआ करता था।उस समय हमारे देश हिन्दूस्तान में कुछ विदेशी लोग घूमने आएे ...

    दास्तान-ए-अश्क - 27
    by SABIRKHAN Verified icon
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    "मुझे मेरी उम्मीद से ज्यादा मिला अय जिंदगी अब कभी मुस्कुराने की गुस्ताखी नहीं करनी मुझे..? "मैडम जी आप कहां हो..?" रज्जो की आवाज सुनकर उसका दिल उछल पड़ा! ...

    पलायन
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                      " पलायन "​गंगा दियारा के गाँव रामपुर में आग लग गयी थी। कुछ ही देर में गाँव के कई घरों ...

    दास्तान-ए-अश्क - 26
    by SABIRKHAN Verified icon
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    मेरे सभी प्यारे दोस्तों.. अश्क' काफी लेट हुई है! उसके लिए क्षमा चाहता हूं कुछ तो मजबूरियां रही है मेरी जानता हूं कि आप सब मुझे समझेंगे! इस कहानी ...

    गुलाबो
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                    " गुलाबो ’’साहेबपुर कमाल स्टेशन के पश्चिमी छोर पर चालीस -पचास बनजारे कुछ दिनों से अपने तम्बुओं को तान डेरा जमाए ...

    शरद पूर्णिमा
    by Pushp Saini
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    कहानी~~शरदपूर्णिमा✒¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤शाम का सुहाना मौसम बाग़ के सौन्दर्य को बढ़ा रहा था,तो दूसरी तरफ कृत्रिम झरनों से फूटती कलकल की ध्वनि के साथ-साथ पक्षियों की चह चहाहट वातावरण को सुमधुर ...

    दास्तान-ए-अश्क - 25
    by SABIRKHAN Verified icon
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    श्याम ढल रही थी!  एक बेजान श्याम..! जो सुब्हा का उजाला लेकर आने का वादा करके जाती है..!  मगर किसको सुब्हा की पहली किरन नसिब थी ये कोई नही जानता ...

    रीति रिवाज को अनुकूल बनाएं
    by r k lal Verified icon
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    रीति रिवाज को अनुकूल बनाएं आर 0 के 0 लाल   तुम यहां सोई हुई हो। तुम्हें पता भी नहीं  कि मेहमान चले गए हैं। तुम बड़ी हो गई ...

    दास्तान-ए-अश्क - 24
    by SABIRKHAN Verified icon
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    किसी ने मुझे एक बहुत अच्छी बात बताई!"एक औरत  वो होती है ,जिसके किचन में खाना बनाने के लिए बहोत सारे व्यंजन- मसाले मौजूद होते हैं! उसके प्रयोग से ...