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    धरना - 4
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 34

    लग भग 8 माह बाद प्रिया... प्रिया... प्रिया दौड़ती हुई सी आती हैं... आ रही हूं बाबा आ रही हूं... निखिल प्रिया को नज़र भर के देखता हैं... कोई कमी रह गयी क्या...? हा वही ...

    इसे डॉलर मत पुकारना बे
    by Nirdesh Nidhi
    • 29

    “इसे डॉलर कभी मत पुकारना बे” शैंकी ने अलोए ब्लेक का गाना प्ले किया, जबसे डॉलर आया था तबसे उसे यह गाना बेहद पसंद आने लगा था । जैसे ही ...

    सांझा
    by Prabodh Kumar Govil
    • 71

    - सेव क्या भाव हैं? मैंने एक सेव हाथ में उठाकर उसे मसलते हुए लड़के की ओर देखते हुए पूछा। - साठ रुपए किलो! कह कर उसने आंखें झुका ...

    जिदंगी कैसी है पहेली
    by Minni Mishra
    • 18

    ( कहानी )* जिंदगी कैसी है पहेली * न चाहते हुए भी मेरी नजरें बारबार आकाश पर चली जा रही थीं | आज वह अकेले बेड पर पड़ा सामने दीवार ...

    धरना - 3
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 51

    निखिल कुछ देर वही खड़ा रहता हैं.... कुछ सोचता हैं... जनता चॉल की बस्ती को निहारता हैं... और फिर वहां से निकल पड़ता हैं... ----------------लेकिन अब जो हुआ प्रिया,  उसे भूल ...

    मर्डर मिस्ट्री - 10
    by Vismay
    • 126

    “ तुम्हें क्या मालूम मुझे कितना मजा आया था उन तीनों की जान लेने में । तड़पा तड़पा कर मारा था । वैसे तो वो मुझे अच्छे से जानते ...

    ज्ञान की सरिता
    by BHARGAV HINDI JUDWAAN
    • 106

                    ज्ञान की सरिता      हर रोज की तरह आज भी सर्दी भरी रात गुजर गई सुबह के छ: बज चुके थे l अभी भी बाहर दरवाजे पर शीत लहर का प्रकोप ...

    नीडी
    by Nirdesh Nidhi
    • 71

                              “ नीडी ““आप, यहाँ ?”नीरू दी को अकस्मात अपने गाँव में देखकर वो विस्मित हो उठे ...

    काश वो ऐसी वैसी होती
    by Prabodh Kumar Govil
    • 143

    समय बदल गया। कोई सबूत, सनद या मिसाल मांगे तो शुभम दे सकता है। चालीस साल पहले एक दिन उसकी नई- नवेली दुल्हन ने उसकी ताज़ा खरीद कर लाई ...

    मर्डर मिस्ट्री - 9
    by Vismay
    • 150

    मनोहर शर्मा को गिरफ्तार किए हुए हफ्ते से भी ऊपर हो गया था । उससे बहुत बार कड़क पूछताछ की गई पर ना उसने अपना जुर्म कबूला ना उसने ...

    धरना - 2
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 52

    धरना -2किचिन में आते हुए प्रिया और निखिल को देखते हुए सुपरवाइज़र ने फ़ौरन उनके पास आकर पूछा क्या हुआ सर...? आपके यहां कोई सूरज नाम का आदमी... हा हा... सर हैं ...

    असल जिंदगी..
    by Tarun Kumar Saini
    • 59

    हैं अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आयेगा..... सुनियेगा एक बार गाना और बोल पर थोड़ा ध्यान दीजियेगा । ज़िंदगी और आवारापन बहुत कम लोग "जी" पाते ...

    धरना - 1
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 77

    शाम हों चली थी, सूरज वसुंधरा को कल आने का वादा करके जा चूका था.. शहर की सड़कों पर दिन की अपेक्षा शाम कुछ ज्यादा ही रंगीन दिखाई देने ...

    मर्डर मिस्ट्री - 8
    by Vismay
    • 152

    समीर ने नाश्ता छोड़कर मिश्रा जी को उसके फ़ोन पर आयी आखिरी कॉल की लोकेशन ढूंढने को बोल दिया । सीरियल किलर ने अपना अगला शिकार दबोच लिया था ...

    मंज़िलों का दलदल - 2
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 57

    गुंजन का रुदन तेज़ होते जा रहा था शायद उसे अपने किये पर पश्चाताप हो रहा था... शायद वो ये सोच रही थी इन आसुओं से उसका किया गया ...

    मर्डर मिस्ट्री - 7
    by Vismay
    • 165

    मातरे जी कंप्यूटर रूम से भागते हुए समीर के पास आए और कहां की कंप्यूटर कीबोर्ड से इस बार मिसिंग लेटर ‘ S ’ है । समीर को अंदाज़ा हो ...

    मंज़िलों का दलदल - 1
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 121

    इस क़ामयाबी के दलदल से कैसे निकलोगे जब मंज़िले -ए- ज़माना ही दलदल हो.... !****************************************गुंजन.... गुंजन.... अरे उठोगी या यू ही सारा दिन सोती रहोगी.... देखो ग्यारह बजने को हैं... और ...

    मर्डर मिस्ट्री - 6
    by Vismay
    • 197

    समीर ने सिगरेट सुलगा लिया और मनोहर से मिलने के लिए निकल पड़ा रेट्रो नाइट क्लब की तरफ़। रेट्रो नाइट क्लब इस शहर का सबसे महंगा नाइट क्लब था ...

    ममता की छाँव - 2
    by Sarita Sharma
    • (17)
    • 394

    हर रविवार छुट्टी के दिन मौली अपने पड़ोस में रहने वाले बच्चों के साथ जानवरों को जंगल छोड़ने जाते और दिन तक घर आ जाते थे..आज भी जब पड़ोस ...

    तेरे नाम से शुरू तेरे नाम पर खत्म
    by Divya Sharma Verified icon
    • 1.5k

    ___________________________“क्या देख रहे हो!हाँ जानती हूँ थोड़ी मोटी हो गई हूँ पर उम्र भी तो देखो पूरी पैंतालीस साल की हूँ।आप भी ना!आँखों से ही सारी बात समझा देते ...

    मर्डर मिस्ट्री - 5
    by Vismay
    • 284

    समीर ने तीनों के बारे में गौर से सोचा। फ़िर अमन और मनोहर शर्मा को पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला किया। क्यू की वॉचमेन तो पहेले से ही ...

    सरनेम गांधी
    by Shikha Kaushik
    • 2.9k

    ''पिया गांधी ...'' उपस्थिति दर्ज़ करती मैडम ने कक्षा में ज्यों ही पिया का नाम पुकारा ग्यारहवी की छात्रा पिया हल्का सा हाथ उठाकर ''यस मैडम '' कहते हुए ...

    थोड़ी देर और ठहर
    by Prabodh Kumar Govil
    • 514

    लम्बी कहानी-"थोड़ी देर और ठहर"      -नहीं-नहीं, जेब में चूहा मुझसे नहीं रखा जायेगा. मर गया तो? बदन में सुरसुरी सी होती रहेगी. काट लेगा, इतनी देर चुपचाप ...

    पीपल बाबा
    by Bhupendra Dongriyal
    • 279

                                 पीपल बाबा        कभी मौका मिलेगा तो मैं आपको अपने गाँव के पीपल बाबा से ...

    अब लौट चले -10 (अंतिम भाग)
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • (12)
    • 542

    अब लौट चले -10सामने के दरवाजे से रवि, अरविन्द और संजना अंदर आ रहें थे. सहमे और डरे हुए से रवि अपना सर झुकाये चुप चाप मनु के सामने ...

    हड़बड़ी में उगा सूरज
    by Prabodh Kumar Govil
    • 458

    हड़बड़ी में उगा सूरजक्रिस्टीना से मेरी पहचान कब से है ? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके बहुत सारे उत्तर हो जाएंगे, और ताज़्जुब मुझे बहुत सारे उत्तर हो ...

    अब लौट चले - 9
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 308

    अब लौट चले -9किसी ज़माने में इस घर में मेरी मर्ज़ी चला करती थी और मनु चुपचाप मेरी ज़िद के आगे झुक जाया करता था. ठीक उसी तरह आज ...

    काश...
    by Saurabh kumar Thakur
    • 426

    अक्सर सोचा करता हूँ कि मैं आखिर पढ़ता कब हूँ ।रात को बारह बजे मोबाइल में नेट आता है,सुबह से शाम तीन बजे तक मोबाइल चलाते रहता हूँ ।फिर ...

    अब लौट चले - 8
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 334

    और में फिर हारी हुई सी बेड पर आकर लेट गई थी.. मन में काफ़ी जद्दोजहद थी कभी मन करता के क्यों ना गुम नाम ही हो जाऊं... किसी को ...

    अब लौट चले - 7
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 335

    कुछ देर हम दोनों यूही बैठे रहे.... मै दोषी थी वो निर्दोष था मै सिर झुकाये बैठी थी अभिषेक मुझें देख रहा था... बिलकुल मनु के गुण वही मिज़ाज़ ...