मेरा पहला घर

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मेरा पहला घरबचपन से ही विनीता के मन में एक प्रश्न बार-बार उठता था—"मेरा अपना घर आखिर है कहाँ?" यह प्रश्न केवल एक जिज्ञासा नहीं था, बल्कि उसके अस्तित्व से जुड़ा एक गहरा विचार था, जो समय के साथ और भी गंभीर होता चला गया।एक दिन उसकी सखी मुस्कुराते हुए बोली,"विनीता, अब तो कुछ ही समय बाद तुम्हारी शादी हो जाएगी। फिर तुम अपने दूसरे घर, यानी ससुराल चली जाओगी।"सखी की यह बात सुनकर विनीता कुछ क्षण मौन रही। फिर उसकी आँखों में अनेक प्रश्न तैरने लगे। उसने शांत स्वर में कहा—"क्या यह मेरा घर नहीं है? क्या मैंने अपना