संयोगिता दीवार से टिककर बैठी थी। उसकी घायल बाँह से अब भी खून बह रहा था। लेकिन उसके चेहरे पर सबसे बड़ा दर्द गोली का नहीं था। उसके सामने बैठा छोटा विवान था। वो जानती थी अगर अभी उसका वो खतरनाक रूप बाहर आया…अगर विवान ने उसकी आँखों में वो साइको killer देख लिया…तो शायद ये बच्चा डर जाएगा। इसलिए आज पहली बार संयोगिता अपने ही अंधेरे को रोक रही थी। उसकी नजर बार-बार दरवाज़े पर जा रही थी। बाहर गुंडे करीब आते जा रहे थे।लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक बात थी—किसी भी तरह विवान को यहाँ से निकालना