अधूरी ख्वाहिश

  • 183
  • 57

कभी-कभी जिंदगी में कुछ लोग बहुत कम समय के लिए आते हैं, लेकिन अपने पीछे ऐसी यादें छोड़ जाते हैं जिन्हें भुलाना आसान नहीं होता।मीरा रोज़ उसी पुराने रास्ते से कॉलेज जाती थी। रास्ते में एक छोटी-सी चाय की दुकान थी, जहाँ आरव अक्सर बैठा किताब पढ़ता रहता था। दोनों की पहली मुलाकात सिर्फ एक मुस्कान से हुई थी।धीरे-धीरे वह मुस्कान बातचीत में बदल गई और बातचीत एक खूबसूरत रिश्ते में।आरव हमेशा कहता था,“मीरा, कुछ रिश्तों को नाम देना जरूरी नहीं होता, बस उन्हें दिल से निभाना जरूरी होता है।”मीरा उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती।लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी ख्वाहिशों के