समर्पण

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     आज के समय में शायद ही कोई ऐसा कार्यालय हो, जहाँ भ्रष्टाचार ने किसी न किसी रूप में अपनी जड़ें न जमा रखी हों। कहीं रिश्वत के रूप में, कहीं चापलूसी के रूप में और कहीं अपने लोगों को लाभ पहुँचाने की प्रवृत्ति के रूप में। सबसे अधिक कठिनाई उस व्यक्ति के लिए होती है, जो इस वातावरण में भी ईमानदारी और अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा का दामन नहीं छोड़ता।नगर पालिका परिषद के कार्यालय में भी परिस्थितियाँ कुछ ऐसी ही थीं।वहाँ आनन्द नाम का एक कर्मचारी कार्यरत था। वह अपने काम के प्रति अत्यन्त निष्ठावान, ईमानदार और