एक तारा जो अंतरिक्ष में कहीं दूर खो गया था । रात का समय था । चारों तरफ काली घटा पसरी हुई थी । मानो यह सब कुछ अपने अंदर समाने को आतुर हो और कोई इसे ऐसा करने से नहीं रोक सकता । सब जगह बस सन्नाटा ही सन्नाटा था । सभी घरो की बत्तियां बुझी हुई थी । सड़क पर एक लाइट चालू थी पर वो भी झप-झप(बंद- चालू) कर रही थी मानो वह भी काली घटा के आगे बेबस थी । यह पूरे गाँव में एकमात्र लाइट थी जो रात के समय काम करती थी ।