मंजिले - भाग 52

  • 351
  • 108

समय ----------- मंजिले सगरहे की पुष्ट कहानी एक जबरदस्त उड़ान कभी चलते घोड़े को देखो वो किसी को पीठ पर बैठने नहीं देता.. पता कयो.. चलो बताओ,नहीं बता सकते, उसकी भी दुलतियां खानी पड़ती है फिर कही जा कर मालिक हो पाते हो उसके। ऐसे ही समय है.... बस फर्क इतना है ये हम पर सवार होता है।समय दुख देता है आपने किये कर्मो का.. हाथ पीछे परम पिता का होता है... सुख का पता दुख के बाद चलता है। अगर सुख मे रहो... तो सोचोगे.. यार थोड़ी तब्दीली हो... बस वो दुख है। "समय के साथ चलने वाले भी