इश्क ए जुनून

"जब नज़रों से दिल तक का सफ़र महज़ एहसास बनकर रह जाए, तो उसे प्यार कहते हैं...पर जब वो ही नज़रें आपकी रूह को नोचने पर उतारू हो जाएं, हर हद, हर बंदिश को चीर दें... तो वो प्यार नहीं, एक खौफनाक जुनून बन जाता है।"जबलपुर। सिंघानिया निवास।वक्त शाम के सात बजे। ड्राइंग रूम में पसरा हुआ सन्नाटा इतना भारी था कि दीवार पर टंगी पुरानी पेंडुलम घड़ी की 'टिक-टिक' भी किसी हथौड़े जैसी लग रही थी।इस घर का एक अलिखित नियम था—पिछले सत्तर सालों से इस खानदान के आंगन में किसी लड़की की किलकारी नहीं गूंजी थी। और फिर,