हीरो...! - 1

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** हीरो...!**  **भाग 1 : पहली मुलाक़ात**सुबह के ठीक 7:15 बजे शहर के एक शांत मोहल्ले में एक छोटी-सी आवाज़ गूँज उठी।“दीदी… उठ जाइए ना… कॉलेज नहीं जाना क्या?”दरवाज़े पर हल्के-हल्के लेकिन लगातार ठक-ठक हो रही थी। अंदर कमरे में बिस्तर पर कोई चादर ओढ़े लेटा था। कमरे में हल्की रोशनी थी। खिड़की से सुबह की पहली किरणें अंदर घुस रही थीं और दीवार पर टंगी बाइक की फोटो को छू रही थीं।“दीदी… पाँच मिनट बोलते-बोलते आधा घंटा हो गया…”आवाज़ और तेज़ हो गई। छोटी लड़की अब दरवाज़ा पीटने के साथ-साथ पैर भी पटक रही थी।अचानक चादर हटी। छोटे-छोटे काले बाल