प्यार का जाल - 9

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"कहिए करण सर, या फिर मिस्टर करण मेहरा कहूँ?" आरव ने फोन कान से लगाते ही बिना किसी भूमिका के बेहद ठंडे और सपाट लहजे में कहा।दूसरी तरफ कुछ सेकंड के लिए गहरा सन्नाटा छा गया। फिर अचानक ठहाके मारकर हँसने की आवाज़ आई। करण का वह सीधा और मासूम दोस्त वाला मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका था।"वाह आरव! मानना पड़ेगा, तुम्हारी डिजिटल फॉरेंसिक स्किल्स का जवाब नहीं। मुझे लगा था कि तुम और यह बेवकूफ रिया एक-दूसरे पर शक करते-करते ही आपस में उलझ जाओगे और मैं आराम से डेटा लेकर निकल जाऊँगा," करण की आवाज़ में एक