[58]शैल ने सरिता के शब्दों को नहीं सुना था। वह नदी की तरफ बढ़ता गया। पानी के समीप वह रुक गया। धीरे धीरे नदी में उतर गया, भीतर भीतर चलने लगा। नदी में आगे बढ़ता गया। सहसा किसी ने पीछे से उसे पकड़ लिया। शैल की गति रुक गई। वह पानी में गिर पडा। वह कुछ समजे, स्वयं को संभाले उससे पूर्व दो हाथों ने पकड़कर शैल को उठा लिया। शैल ने मुड़कर देखा। प्रत्यक्ष सरिता थी। सरिता की आँखों में तीव्र रोष था। जैसे कह रही हो, ‘मरने का विचार है क्या? इस प्रकार कोई पुलिसवाला आत्महत्या करता है क्या?’ सरिता