रिश्तों का बाजार

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रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के लिए नए कपड़े, कंगन और फ्रॉक। सोच रही थी, भाभी देखकर खुश हो जाएगी, गले लगाएगी, कहेगी - दीदी तुम कितना याद रखती हो।पर दरवाजा खुलते ही सपना टूट गया।भाभी प्रिया ने उसे देखते ही माथा पकड़ लिया। पति से बोली, "अब दीदी आ गई हैं, वही खिलाएंगी बना के सबको। मैं चली अपने कमरे में, सुबह से वीडियो नहीं बनाई, मुझे वीडियो