आधी रात का समय। बाहर बिजली चमक रही है। सिया करवटें बदल रही है, उसका चेहरा बेचैन है।) सिया की पलकों के नीचे हरकत। उसके माथे पर पसीना। और तभी सपना शुरू होता है...) सपना — काली रात, सुनसान जंगल, आसमान में लाल चाँद।चारों ओर से चमगादड़ जैसी परछाइयाँ उड़ती आ रही हैं।वो सब धीरे-धीरे इंसानी रूप लेते हैं — वैम्पायर्स का एक झुंड।सिया और करण (उर्फ कबीर) दौड़ रहे हैं। कबीर के कंधे पर सिया — वो घायल है। जंगल के पेड़ पीछे छूट रहे हैं, चारों तरफ़ फुफकारने की आवाज़ें।वैम्पायर लीडर (गर्जना के साथ) बोला - “करण! उसे हमें दे